हमारा इंडिया न्यूज (हर पल हर खबर) मध्यप्रदेश/जबलपुर। मध्यप्रदेश की जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस केन्द्रीय कारागार में अब आए दिन सेंध लग रही है, हाल ही में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बिना डिग्रीधारी फि जिओथेरेपिस्ट को नशीले पदार्थो को सप्लाई करते हुए पकड़ा गया है। संजय दाहिया फि जिओथेरेपिस्ट बनकर जेल में प्रवेश किया करता था, जिसमें पूर्ण रूप से उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश का उसको समर्थन था।
फि जिथेरेपिस्ट संजय दहिया जेल में सजा काट रहे कैदियों को उनकी जरूरतों का तमाम समान पहुंचाने का कार्य जेलर के संरक्षण में किया करता था, लेकिन जेल में अचानक से हुई संघन की जांच की जानकारी संजय दाहिया के सहयोगी जेलर को न होने के कारण उस तक यह जानकारी नहीं पहुंच पाई कि आज जेल में चैकिंग होगी और अचानक से हुई चैकिंग में संजय दाहिया मादक पदार्थ गांजा, तम्बाकू, सिगरेट, बीडी, गुटखा व अन्य नशीले पदार्थों के पाउच, ब्लेड व नगद रूपयों के साथ पकड़ा गया। जिसके संबंध का मामला सिविल लाइन थाने में दर्ज किया गया है।
दबदबा इतना था कि बिना जांच के अंदर चला जाता था:-
जेल के विश्वनीय सूत्रों के मुताबिक संजय दाहिया पिछले कई सालों से बड़े-बडे अपराध में लिप्त आरोपियों को फि जियोथेरेपी का ट्रीटमेंट के बहाने नशीले पदार्थ की सप्लाई किया करता था, जिसके लिए जेल के वरिष्ठ अधिकारियों को उसका पूर्ण रूप से संरक्षण प्राप्त है, इसी वजह से वरिष्ठ अधिकारीयों की मिलीभगत के चलते धड़ल्ले से बिना किसी आमद दर्ज कराए और बिना चैकिंग कराए जेल के अंदर जाया करता था और अवैध पदार्थों की सप्लाई किया करता था।
अधिकारियों की मिलीभगत से करने लगा सप्लाई:-
जानकारी यह भी मिली है कि नागरथ चौक स्थित सिटी अस्पताल में संजय दहिया जो की सफ ाई कर्मियों का सुपरवाईजर हुआ करता था, अब वह बिना डिग्री के फि जिथेरेपिस्ट बनकर ट्रीटमेंट देने के नाम पर जेल में बंद कैदियों को नशीले पदार्थ अधिकारी की साठगांठ से सप्लाई का काम चालू कर दिया है। बताया गया है कि संजय दाहिया के ऊपर कई मामले पंजीबद्ध हैं, जिसको बिना पुलिस वेरिफेकशन व अन्य कोई आदेश से जेल के अंदर आने-जाने की अनुमति प्रदान की गई।
सीसीटीव्ही कैमरे कर देंगे दूध का दूध और पानी का पानी:-
जानकारी के अनुसार जेल में जो भी अंदर जाता है, उसकी रजिस्ट्रर में एन्ट्री होती है और बकायदा उसकी जांच होती है, लेकिन संजय दाहिया के वरिष्ठ अधिकारियों से इतने करीबी संबंध थे कि न तो उसकी जेल में आने की एन्ट्री होती थी और न ही जाने कि अगर इस संबंध की जांच की जेल में लगे सीसीटीव्ही कैमरों से की जाएगी तो इस बात का खुलासा हो जाएगा और पिछले एक माह का भी अगर रिकार्ड सीसीटीव्ही कैमरों के माध्यम से खंगाले जाएंगे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, यानि की संजय दाहिया की वरिष्ठ अधिकारियों से हुई सांठगांठ का भी खुलासा हो जाएगा।
मोबाईल फोन से हो जाएगा खुलासा:-
जेल के सबसे विश्वनीय सूत्रों ने बताया कि अगर उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश के मोबाईल फोन की भी जांच की जाए तो संजय दाहिया और मदन कमलेश का आपस में संबंध होना उजागर हो जाएगा और वाट्सएप की जांच में पूरा मामला सामने आ जाएगा। वहीं सूत्रों ने बताया कि मदन कमलेश के ऐसे एक संजय दाहिया नहीं बल्कि कई अपराध जगत से नाता रखने वालों से संबंध हैं, जिसका खुलासा उनका स्वयं का मोबाईल फोन कर सकता है।
यहां पर होता है पैसों का लेन देन:-
सूत्रों ने जानकारी दी है कि उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश जेल के अंदर तमाम प्रकार की व्हीआईपी सुविधाएं प्रदान करवाने के लिए अपनी पैसों की डीलिंग सिविल लाईन चाय की दुकान और इनकम टैक्स के समीप स्थित पान की टपरे के पास किया करते हैं, जहां पर संबंधितों से पैसों का लेनदेन होता है और फिर उसके बाद संबंधित की अच्छी खातिरदारी होती है।
दबदबा इतना था कि बिना जांच के अंदर चला जाता था:-
जेल के विश्वनीय सूत्रों के मुताबिक संजय दाहिया पिछले कई सालों से बड़े-बडे अपराध में लिप्त आरोपियों को फि जियोथेरेपी का ट्रीटमेंट के बहाने नशीले पदार्थ की सप्लाई किया करता था, जिसके लिए जेल के वरिष्ठ अधिकारियों को उसका पूर्ण रूप से संरक्षण प्राप्त है, इसी वजह से वरिष्ठ अधिकारीयों की मिलीभगत के चलते धड़ल्ले से बिना किसी आमद दर्ज कराए और बिना चैकिंग कराए जेल के अंदर जाया करता था और अवैध पदार्थों की सप्लाई किया करता था।
अधिकारियों की मिलीभगत से करने लगा सप्लाई:-
जानकारी यह भी मिली है कि नागरथ चौक स्थित सिटी अस्पताल में संजय दहिया जो की सफ ाई कर्मियों का सुपरवाईजर हुआ करता था, अब वह बिना डिग्री के फि जिथेरेपिस्ट बनकर ट्रीटमेंट देने के नाम पर जेल में बंद कैदियों को नशीले पदार्थ अधिकारी की साठगांठ से सप्लाई का काम चालू कर दिया है। बताया गया है कि संजय दाहिया के ऊपर कई मामले पंजीबद्ध हैं, जिसको बिना पुलिस वेरिफेकशन व अन्य कोई आदेश से जेल के अंदर आने-जाने की अनुमति प्रदान की गई।
सीसीटीव्ही कैमरे कर देंगे दूध का दूध और पानी का पानी:-
जानकारी के अनुसार जेल में जो भी अंदर जाता है, उसकी रजिस्ट्रर में एन्ट्री होती है और बकायदा उसकी जांच होती है, लेकिन संजय दाहिया के वरिष्ठ अधिकारियों से इतने करीबी संबंध थे कि न तो उसकी जेल में आने की एन्ट्री होती थी और न ही जाने कि अगर इस संबंध की जांच की जेल में लगे सीसीटीव्ही कैमरों से की जाएगी तो इस बात का खुलासा हो जाएगा और पिछले एक माह का भी अगर रिकार्ड सीसीटीव्ही कैमरों के माध्यम से खंगाले जाएंगे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, यानि की संजय दाहिया की वरिष्ठ अधिकारियों से हुई सांठगांठ का भी खुलासा हो जाएगा।
मोबाईल फोन से हो जाएगा खुलासा:-
जेल के सबसे विश्वनीय सूत्रों ने बताया कि अगर उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश के मोबाईल फोन की भी जांच की जाए तो संजय दाहिया और मदन कमलेश का आपस में संबंध होना उजागर हो जाएगा और वाट्सएप की जांच में पूरा मामला सामने आ जाएगा। वहीं सूत्रों ने बताया कि मदन कमलेश के ऐसे एक संजय दाहिया नहीं बल्कि कई अपराध जगत से नाता रखने वालों से संबंध हैं, जिसका खुलासा उनका स्वयं का मोबाईल फोन कर सकता है।
यहां पर होता है पैसों का लेन देन:-
सूत्रों ने जानकारी दी है कि उप जेल अधीक्षक प्रशासन मदन कमलेश जेल के अंदर तमाम प्रकार की व्हीआईपी सुविधाएं प्रदान करवाने के लिए अपनी पैसों की डीलिंग सिविल लाईन चाय की दुकान और इनकम टैक्स के समीप स्थित पान की टपरे के पास किया करते हैं, जहां पर संबंधितों से पैसों का लेनदेन होता है और फिर उसके बाद संबंधित की अच्छी खातिरदारी होती है।
आखिर क्यों जमे हैं इतने सालों से:-
नियमानुसार कोई भी अधिकारी व कर्मचारी एक ही विभाग में एक ही स्थान में कम से कम तीन वर्ष तक पदस्थ हो सकता है, लेकिन वर्ष 2019 से जबलपुर जेल में पदस्थ मदन कमलेश आज वर्तमान में भी पदस्थ है, जिन्हें एक ही स्थान में जमा होना कहीं न कहीं उनकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह अंकित करता है।
सिवनी में बना है आलीशान मकान:-
जेल के सबसे विश्वनीय सूत्रों ने बताया कि एक मदन कमलेश ने सिवनी में कई करोड़ रूपये का आलीशान मकान बनाया हुआ है, अगर इस संबंध की जांच हो जाए कि इतना पैसा एक नौकरी में उनके पास कहा से आया है तो इस प्रकार से मदन कमलेश कई करोड़ रूपये के आसामी निकलेंगे। इस मामले का खुलासा लोकायुक्त जांच में हो सकता है, बताया गया है कि मकान निर्माण में जेल में बंद कई कैदियों को उनके द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं के एवज में रूपए व सामग्री प्रदान कराई गई है।